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शारदा विश्वविद्यालय में जीएसटी सुधारों पर दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित

सुन्दर लाल शर्मा गौतम बुद्ध नगर

ग्रेटर नोएडा: शारदा यूनिवर्सिटी के शारदा स्कूल ऑफ मीडिया, फिल्म एंड एंटरटेनमेंट द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग एवं प्रायोजन में “मीडिया परिप्रेक्ष्य से जीएसटी सुधार: नागरिकों को सशक्त बनाना और विकसित भारत के लिए जन-जागरूकता बढ़ाना” विषय पर दो दिवसीय

नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में जीएसटी सुधारों को आम नागरिकों तक सरल एवं प्रभावी भाषा में पहुंचाने, आर्थिक नीतियों को समझाने और विकसित भारत के निर्माण में जन-जागरूकता की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई।

कॉन्फ्रेंस के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों की जानकारी केवल विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों या कारोबारी वर्ग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम नागरिकों को भी इसकी जानकारी सरल और सहज भाषा में मिलनी चाहिए।

मीडिया को सरकार की आर्थिक नीतियों और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि जिम्मेदार पत्रकारिता के माध्यम से जटिल आर्थिक विषयों को सरल बनाकर लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

कॉन्फ्रेंस में डिजिटल मीडिया, टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म के माध्यम से जीएसटी सुधारों की जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में मीडिया के पास आर्थिक विषयों को इन्फोग्राफिक्स, वीडियो, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया कंटेंट और आसान भाषा में तैयार की गई खबरों के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के अवसर हैं।

कॉन्फ्रेंस विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण मंच रहा। विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े प्रोफेशनल्स और पत्रकारों ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और आर्थिक मुद्दों की रिपोर्टिंग, न्यूज प्रेजेंटेशन, डिजिटल पत्रकारिता तथा जिम्मेदार मीडिया कवरेज के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से संवाद करते हुए आर्थिक पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा।

*मुख्य अतिथि डॉ. यशोवर्धन पाठक, कमिश्नर, जीएसटी एवं सेंट्रल एक्साइज, भारत सरकार ने कहा:* “जीएसटी जैसे आर्थिक सुधारों को समझने के लिए आम नागरिक को जटिल तकनीकी भाषा की नहीं, बल्कि सरल और विश्वसनीय जानकारी की आवश्यकता है। मीडिया इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जब आर्थिक नीतियों की सही जानकारी लोगों तक पहुंचेगी, तभी नागरिक न केवल अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति में भी अधिक प्रभावी भागीदारी कर सकेंगे।”

*शारदा स्कूल ऑफ मीडिया, फिल्म एंड एंटरटेनमेंट की डीन (डॉ.) रितु एस. सूद ने कहा:* “विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों की भी आवश्यकता है। आर्थिक सुधारों को लेकर सही जन-जागरूकता लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करती है। इसलिए मीडिया संस्थानों और पत्रकारों की जिम्मेदारी है कि वे आर्थिक नीतियों को तथ्यों के साथ, निष्पक्ष और जनसामान्य की समझ के अनुरूप प्रस्तुत करें।”

इस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रो. (डॉ.) सिबराम खारा, वाइस चांसलर, शारदा यूनिवर्सिटी, प्रो. डॉ. दुर्गेश त्रिपाठी, प्रो. दुष्यंत कुमार राय, प्रो. डॉ. सचिन भारती, प्रो. रमेश कुमार शर्मा, डॉ. सोनाली श्रीवास्तव, डॉ. मुक्ता मारटोलिया, डॉ. ध्रुव सभरवाल, प्रो. दीपाली वर्मा, प्रो. अशरफ अली, डॉ. श्रृंखला उपाध्याय सहित सभी विभागों के हेड, डीन, फैकल्टी मेंबर्स, स्टाफ, स्टूडेंट्स आदि मौजूद रहे।

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