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तीन पीढ़ियों की खेती को नवाचार से मिला नया मुकाम, यूपीआईटीएस-2026 में ‘बुद्धा डिलाइट्स’ को मिलीं 200 बिजनेस इंक्वायरी, जिनकी कुल अनुमानित कारोबारी संभावनाएं करीब 04 करोड़ रुपये

सुन्दर लाल शर्मा गौतम बुद्ध नगर

गौतमबुद्धनगर, 03 अक्टूबर 2026 (UPITS)

सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पीढ़ियों से महकता कालानमक चावल अब केवल थाली तक सीमित नहीं है। वही पारंपरिक खुशबू अब कुकीज़ के स्वाद में ढलकर देश की सीमाओं से बाहर वैश्विक बाजार तक अपनी पहचान बना रही है। एक परिवार की तीन पीढ़ियों की खेती, एक युवा उद्यमी के नवाचार और उपलब्ध अवसरों के समन्वय से शुरू हुआ यह सफर आज स्थानीय कृषि विरासत को आधुनिक उद्यमिता से जोड़ने की प्रेरक कहानी बन गया है।

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 (यूपीआईटीएस-2026) इंडिया एक्सपो मार्ट एवं सेंटर ग्रेटर नोएडा में सिद्धार्थनगर की मेसर्स बुद्धा डिलाइट्स द्वारा कालानमक चावल से तैयार कुकीज़ जब देश-विदेश के खरीदारों के सामने पहुंचीं, तो स्वाद के साथ कालानमक चावल की विशिष्ट पहचान ने भी उनका ध्यान आकर्षित किया। ट्रेड शो के दौरान इकाई को 200 बिजनेस इंक्वायरी प्राप्त हुईं, जिनकी कुल अनुमानित कारोबारी संभावनाएं करीब 04 करोड़ रुपये की हैं।

यह उपलब्धि केवल एक उद्यम की व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि इस बात का उदाहरण भी है कि स्थानीय कृषि उत्पादों में नवाचार और मूल्य संवर्धन के माध्यम से गांव और खेत से निकलने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जा सकता है।

*फ्रांस तक पहुंची कालानमक चावल की महक, 50 हजार कुकीज़ का मिला ऑर्डर*

यूपीआईटीएस-2026 बुद्धा डिलाइट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबार का महत्वपूर्ण माध्यम भी बना। इकाई के संस्थापक डॉ. अजय कुमार रावत ने फ्रांस के एक बायर के साथ एमओयू साइन किया है। इसके अंतर्गत 50 हजार कुकीज़ की आपूर्ति का कन्फर्म ऑर्डर प्राप्त हुआ है, जिसकी कुल कीमत 20 लाख रुपये है।

सिद्धार्थनगर के खेतों में उगने वाले कालानमक चावल से बने उत्पाद का फ्रांस के बाजार तक पहुंचना स्थानीय कृषि विरासत के वैश्विक संभावनाओं से जुड़ने का उदाहरण है। जिस फसल को परिवार पीढ़ियों से खेत में उगा रहा था, आज उसी फसल से तैयार उत्पाद के लिए विदेश से व्यावसायिक ऑर्डर मिलना इस यात्रा को विशेष बनाता है।

*उपभोक्ताओं ने भी अपनाया स्वाद, UPITS में 04.70 लाख रुपये की बिक्री*

व्यापारिक खरीदारों के साथ आम उपभोक्ताओं ने भी कालानमक चावल से तैयार उत्पादों में रुचि दिखाई। यूपीआईटीएस-2026 के दौरान बुद्धा डिलाइट्स ने बी2सी श्रेणी में 04.70 लाख रुपये की बिक्री दर्ज की।

कालानमक कैश्यू कुकीज़, एरोमैटिक ब्राउन राइस कुकीज़, ड्राई फ्रूट शुगर फ्री कुकीज़ और जैगरी कुकीज़ जैसे अलग-अलग उत्पादों ने यह संभावना सामने रखी कि पारंपरिक अनाज को आधुनिक स्वाद और उपभोक्ता की आवश्यकता के अनुरूप प्रस्तुत कर उसके लिए नया बाजार तैयार किया जा सकता है।

*दादा-परदादा के खेतों से मिली विरासत को बनाया उद्यम का आधार*

इस सफलता की जड़ें सिद्धार्थनगर के उन खेतों में हैं, जहां डॉ. अजय कुमार रावत का परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से कालानमक चावल की खेती करता आ रहा है।

शिक्षक पिता और गृहिणी माता के परिवार में पले-बढ़े डॉ. रावत ने राजनीति विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने नेचुरोपैथी योगा में भी डॉक्टरेट किया। राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर के रूप में कार्य करते हुए भी उनके मन में अपनी मिट्टी और कालानमक से जुड़ी पारिवारिक विरासत को कुछ नया स्वरूप देने का विचार बना रहा।

*यही विचार धीरे-धीरे प्रयोग में बदला।*

कालानमक को केवल चावल के रूप में बेचने के बजाय उससे ऐसे उत्पाद तैयार करने की सोच विकसित हुई, जिन्हें नई पीढ़ी और आधुनिक बाजार भी सहजता से अपना सके। इस विचार को वास्तविक उत्पाद में बदलने के लिए डॉ. रावत ने स्वयं खाद्य उत्पाद निर्माण की बारीकियां सीखीं और पुणे से कुकरी एवं बेकरी में डिप्लोमा कोर्स पूरा किया।

इसके बाद कालानमक चावल के अलग-अलग वैरिएंट्स पर प्रयोगों का सिलसिला शुरू हुआ। लगातार प्रयासों के बाद वर्ष 2024 में मेसर्स बुद्धा डिलाइट्स की स्थापना हुई।

*परंपरा वही रही, बदल गया उसका स्वरूप*

डॉ. रावत ने कालानमक की मूल पहचान को बनाए रखते हुए उसे आधुनिक खाद्य उत्पादों से जोड़ने का प्रयास किया। इसी प्रयोग से कालानमक कैश्यू कुकीज़, एरोमैटिक ब्राउन राइस कुकीज़, ड्राई फ्रूट शुगर फ्री कुकीज़ और जैगरी कुकीज़ जैसे उत्पाद सामने आए।

यह बदलाव केवल उत्पाद का नहीं था। इसके साथ कालानमक के लिए बाजार का दायरा भी बदलने लगा।

जो कालानमक पहले मुख्यतः चावल के रूप में उपभोक्ता तक पहुंचता था, वही अब मूल्यवर्धित उत्पाद के रूप में नई उपभोक्ता श्रेणियों और नए बाजारों तक पहुंच रहा है।

आज बुद्धा डिलाइट्स का वार्षिक टर्नओवर लगभग 3 करोड़ रुपये है। यूपीआईटीएस-2026 में मिली करीब 4 करोड़ रुपये की 200 बिजनेस इंक्वायरी और फ्रांस से प्राप्त 20 लाख रुपये के कन्फर्म ऑर्डर ने उद्यम के विस्तार की संभावनाओं को और मजबूत किया है।

*वित्तीय संबल मिला तो सपनों को विस्तार देने का रास्ता खुला*

किसी नवाचार को सफल उद्यम में बदलने के लिए विचार और परिश्रम के साथ वित्तीय संसाधन भी आवश्यक होते हैं। डॉ. रावत के उद्यम को आगे बढ़ाने में ‘एक जनपद एक व्यंजन पोषण वित्त योजना’ ने महत्वपूर्ण संबल प्रदान किया।

योजना के अंतर्गत उन्होंने 50 लाख रुपये का ऋण लिया है, जिस पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के माध्यम से 10 लाख रुपये की मार्जिन मनी (सब्सिडी) उपलब्ध कराई जाएगी।

इस वित्तीय सहयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादों को नए बाजारों तक पहुंचाने और उद्यम को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ने का आधार मिला है।

*“अपनी मिट्टी की पहचान को दुनिया तक पहुंचाना ही सपना”*

डॉ. अजय कुमार रावत के लिए यह उद्यम केवल कारोबार नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और उससे जुड़ी पहचान को आगे ले जाने का माध्यम भी है। उनका उद्देश्य कालानमक की विशिष्ट सुगंध और स्वाद को मूल्यवर्धित उत्पादों के माध्यम से देश-दुनिया के उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है।

यूपीआईटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने उत्पाद प्रस्तुत करने, देश-विदेश के खरीदारों से सीधे संवाद करने और फ्रांस से व्यावसायिक ऑर्डर प्राप्त करने को वे अपने उद्यम की यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव मानते हैं।

उन्होंने उपलब्ध कराए गए मंच, संबंधित विभागों के सहयोग और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अवसर छोटे और स्थानीय उद्यमों को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने तथा नए बाजारों तक पहुंचने का मार्ग प्रदान करते हैं।

*खेत से कुकीज़ तक… और सिद्धार्थनगर से फ्रांस तक*

सिद्धार्थनगर के एक खेत से शुरू हुई यह कहानी आज अंतरराष्ट्रीय कारोबार के द्वार तक पहुंच चुकी है।

तीन पीढ़ियों ने जिस कालानमक को खेतों में सहेजा, अगली पीढ़ी ने उसी विरासत में नवाचार जोड़ा। चावल से कुकीज़ बनीं, स्थानीय उत्पाद को नया बाजार मिला और सिद्धार्थनगर की मिट्टी की खुशबू फ्रांस तक पहुंचने लगी।

बुद्धा डिलाइट्स की यह यात्रा बताती है कि जब परंपरा के साथ नवाचार, कौशल, वित्तीय अवसर और बाजार का मंच जुड़ता है, तो स्थानीय उत्पाद केवल अपनी पहचान ही नहीं बनाता, बल्कि गांव और खेत से निकलकर वैश्विक बाजार तक पहुंचने की क्षमता भी विकसित करता है।

*डॉ. अजय कुमार रावत ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रति किया आभार व्यक्त*

इस उपलब्धि के लिए डॉ. अजय कुमार रावत ने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच ने सिद्धार्थनगर के स्थानीय उत्पाद कालानमक चावल को देश-विदेश के खरीदारों के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों, विभागीय सहयोग और ऐसे वैश्विक मंचों के माध्यम से छोटे एवं स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है। डॉ. रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से उन्हें भी अपने पारंपरिक कालानमक चावल को मूल्यवर्धित उत्पादों के रूप में देश-दुनिया तक पहुंचाने का हौसला मिला है। उन्होंने यूपीआईटीएस-2026 में मंच उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री जी एवं उत्तर प्रदेश सरकार का हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया।

आज कालानमक की यह कहानी केवल एक चावल, एक कुकी या एक उद्यम की कहानी नहीं है—यह परंपरा को संभावनाओं में और स्थानीय पहचान को वैश्विक अवसर में बदलने की सफलता की कहानी है।

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