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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक सम्पन्न

सुन्दर लाल शर्मा गौतम बुद्ध नगर

गौतमबुद्धनगर 04 अगस्त, 2026

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में निजी विद्यालयों द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए शुल्क वृद्धि एवं शुल्क विनियमन अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन की समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि 06 विद्यालयों द्वारा निर्धारित सीमा 7.23 प्रतिशत से अधिक फीस वृद्धि की गई है तथा 01 विद्यालय द्वारा कम्पोजिट फीस के अतिरिक्त अलग से एनुअल चार्ज लिया जा रहा है। इस पर जिला शुल्क नियामक समिति द्वारा उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के प्रावधानों के अंतर्गत आवश्यक निर्णय लिए गए।

समिति द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वृद्धि करने वाले विद्यालयों को पूर्व में कुल 45 नोटिस जारी कर नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद 07 विद्यालयों द्वारा उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए निर्धारित सीमा से अधिक फीस वृद्धि की गई।
समिति ने निर्णय लिया कि शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के प्रावधानों के अनुसार अधिकतम 7.23 प्रतिशत फीस वृद्धि अनुमन्य है। इसके बावजूद ऐ०पी०जे० स्कूल, सेक्टर-16 नोएडा, स्पर्श ग्लोबल स्कूल, एच०एस०-1 सेक्टर-20 ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रामाज्ञा स्कूल, सेक्टर-50 नोएडा, विश्व भारती स्कूल, सेक्टर-28 नोएडा, श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल, गौर सिटी ग्रेटर नोएडा तथा सेन्ट जोन्स स्कूल, एच०एस०-01 सेक्टर-02 ग्रेटर नोएडा द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक फीस वृद्धि किए जाने के कारण उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 की धारा 4(1) के उपबंधों का प्रथम बार उल्लंघन मानते हुए प्रत्येक पर 01 लाख रुपये तक का अर्थदंड अधिरोपित किया गया।
बैठक में यह भी पाया गया कि बाल भारती पब्लिक स्कूल, सेक्टर-21 नोएडा द्वारा शैक्षिक वर्ष 2025-26 का फीस स्ट्रक्चर अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया तथा कम्पोजिट फीस के अतिरिक्त अलग से एनुअल चार्ज लिया गया। इसे अधिनियम के प्रावधानों का प्रथम बार उल्लंघन मानते हुए विद्यालय पर भी 01 लाख रुपये तक का अर्थदंड अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया।

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