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खेत बचाओ अभियान के तहत जेवर में प्राकृतिक खेती कार्यशाला आयोजित, किसानों को टिकाऊ कृषि अपनाने के लिए किया गया प्रेरित

सुन्दर लाल शर्मा गौतम बुद्ध नगर

गौतमबुद्धनगर 20 जून, 2026

उप कृषि निदेशक गौतमबुद्धनगर राजीव कुमार ने बताया कि भारत सरकार एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा संचालित राष्ट्र व्यापी खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत आज ब्लाक परिसर जेवर में प्राकृतिक खेती विषयक द्वितीय कृषक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। देशभर में 01 जून से 30 जून 2026 तक संचालित इस अभियान का उद्देश्य मृदा स्वास्थ्य संरक्षण रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।

आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जेवर विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक धीरेन्द्र सिंह रहे। साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्र प्रभारी डा० विपिन कुमार, वैज्ञानिक डा० बोनिका पन्त व डा० सुनील प्रजापति, उप कृषि निदेशक राजीव कुमार तथा खण्ड विकास अधिकारी अंकित कुमार सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील कृषकों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में किसान भाइयों एवं बहनों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत उद्बोधन के साथ हुआ। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा प्राकृतिक खेती की अवधारणा इसके सिद्धांतों तथा वर्तमान कृषि परिदृश्य में इसकी आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है बल्कि मृदा की उर्वरता जैव विविधता तथा पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अपने संबोधन में माननीय विधायक जेवर धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती आज की आवश्यकता है। अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है तथा उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक टिकाऊ एवं लाभकारी विकल्प के रूप में उभर रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाकर स्वस्थ कृषि प्रणाली के निर्माण में अपना योगदान दें तथा व भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन को रोकने व पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कृषकों से आह्वाहन किया।
कार्यशाला के दौरान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों जैसे बीज उपचार जीवामृत निर्माण मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन फसल विविधीकरण जैविक अपशिष्टों के उपयोग एवं प्राकृतिक कीट प्रबंधन तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया। किसानों को प्राकृतिक खेती के सफल उदाहरणों एवं अनुभवों से भी अवगत कराया गया।
किसानों ने कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता करते हुए प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक आधार पर समाधान प्रस्तुत किया गया। उपस्थित कृषकों ने प्राकृतिक खेती को अपनाने तथा अपने गांवों में इसके प्रचार प्रसार का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों किसानों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा द्वारा किसानों को भविष्य में भी प्राकृतिक खेती संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।
अंत में उप कृषि निदेशक द्वारा इस कार्यशाला को किसानों में प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को प्रोत्साहित करने तथा टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि प्रणाली के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कार्यकम के समापन की घोषण की गयी।

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