पुरूषोत्तम माह मे दान,तप, सप्त नदी,सरोवर, सागर अमृत स्नान लाभ प्राप्त करने का अधिकार मास श्री पुरूषोत्तम श्रीराम
सुन्दर लाल शर्मा गौतम बुद्ध नगर

*यमुना जी का पृथ्वी पर प्रकट जन्म* पुराणों में बहुत ही दिव्य और सुंदर कथा है। यमुना कोई साधारण नदी नहीं, *सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन* हैं।
*यमुना जी का जन्म और पृथ्वी पर अवतरण*
*1. दिव्य उत्पत्ति*
*सूर्य देव* का विवाह *विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा* से हुआ। संज्ञा सूर्य का तेज सहन नहीं कर पाती थी, इसलिए अपनी छाया *छाया* को छोड़कर वन में तपस्या करने चली गई।
*सूर्य और छाया से 3 संतानें हुईं*: शनिदेव, तपती और *यमुना*। सूर्य और संज्ञा से *वैवस्वत मनु और यमराज* हुए।
इस प्रकार *यमुना जी, यमराज की जुड़वां बहन* हैं। इसलिए यमुना को *यमी* भी कहते हैं।
*2. पृथ्वी पर प्रकट होने की कथा*
*पद्म पुराण और गर्ग संहिता* के अनुसार:
कलियुग में पाप बढ़ने पर *भगवान श्रीकृष्ण* ने अपने परमधाम गोलोक से अपनी *अष्ट पटरानियों को पृथ्वी पर भेजने* का निश्चय किया। उनमें से एक *कालिंदी देवी* थीं।
*ब्रह्माजी ने सूर्यदेव से प्रार्थना की* कि आप अपनी पुत्री कालिंदी को पृथ्वी पर भेजें, ताकि वहाँ कृष्ण अवतार में उनकी पत्नी बन सकें और जीवों का उद्धार हो।
*सूर्यदेव ने यमुना को कलिंद पर्वत* पर उतारा। कलिंद पर्वत सूर्य का ही एक नाम *कलिंद* है, इसलिए यमुना को *कालिंदी* कहा गया।
*यमुना जी कलिंद पर्वत से निकलीं* और *यमुनोत्री* से होते हुए पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं। यमुनोत्री उत्तराखंड के गढ़वाल में है, वहीं से यमुना का उद्गम है।
*3. कृष्ण से संबंध*
यमुना जी ने *कठोर तप* किया कि भगवान श्रीकृष्ण उन्हें पति रूप में मिलें। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर *श्रीकृष्ण ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया* और वे *अष्ट पटरानियों में से एक “कालिंदी”* बनीं।
*महाभारत* में वर्णन है कि अर्जुन ने पांडवों के राजसूय यज्ञ के समय यमुना तट पर कालिंदी से भेंट की और कृष्ण से उनका विवाह कराया।
*यमुना जी का महत्व*
1. *पाप मुक्तिदायिनी*: गंगाजी स्नान से पाप धुलते हैं, पर *यमुना जी के दर्शन मात्र से मनुष्य यमलोक की यातना से मुक्त* हो जाता है। यमराज ने वचन दिया था कि जो भाई-दूज पर यमुना में स्नान करेगा, उसे यमदंड नहीं मिलेगा।
2. *कृष्ण प्रिया*: ब्रज की संस्कृति यमुना के बिना अधूरी है। रासलीला, कालिया नाग दमन सब यमुना तट पर हुआ।
3. *काली नदी क्यों*: कालिया नाग के विष से यमुना का जल काला हो गया था, इसलिए *कालिंदी* कहलाईं।
*भाई दूज की कथा*
यमुना जी ने अपने भाई *यमराज* को कार्तिक शुक्ल द्वितीया को घर बुलाकर तिलक किया, भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वर दिया कि *जो भाई इस दिन यमुना में स्नान कर बहन से तिलक कराएगा, उसे यम का भय नहीं रहेगा*। तभी से *भैया दूज/यम द्वितीया* मनाते हैं।
पुरूषोत्तम माह मे श्रीमद्भागवत पुराण सप्ताह श्रवण पवित्र सरोवर गंगा,यमुना स्नान लाभ प्राप्त कर
*कुण्डेश्वर महादेव की कृपा* से यमुना जी श्रीकृष्ण गोविन्दाय की भक्ति सभी को प्राप्त हो।
*जय यमुना मैया! हर हर महादेव! जय श्री कृष्ण!* संकलन पंडित कुंजबिहारी.वशिष्ठ ज्योतिषाचार्य सूर्यदेव उपासक मुरादनगर वाले,









