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आपदा जोखिम न्यूनीकरण के अंतर्गत आपदा मित्र एवं रिस्पॉन्डर्स की भूमिका और दायित्वों पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

सुन्दर लाल शर्मा गौतम बुद्ध नगर

गौतमबुद्धनगर 03 नवम्बर, 2026

उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम तथा अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के मार्गदर्शन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के अंतर्गत आपदा मित्र एवं रिस्पॉन्डर्स की भूमिका एवं दायित्वों के संबंध में आज जिलाधिकारी कार्यालय, गौतमबुद्धनगर में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 100 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। इस दौरान राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), अग्निशमन विभाग, चिकित्सा विभाग एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं से बचाव, राहत एवं बचाव कार्यों तथा आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया के संबंध में प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आपदा की स्थिति में त्वरित एवं सुरक्षित प्रतिक्रिया देने, प्राथमिक उपचार, खोज एवं बचाव कार्य, अग्नि सुरक्षा, घायलों को प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराने तथा आपदा के दौरान विभिन्न विभागों एवं संबंधित टीमों के बीच समन्वय स्थापित कर राहत कार्यों में सहयोग प्रदान करने के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई

प्रशिक्षकों ने बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित आपदा मित्रों एवं रिस्पॉन्डर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आपदा के दौरान प्रारंभिक स्तर पर त्वरित एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध होने से जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आपदा मित्रों एवं रिस्पॉन्डर्स की क्षमता संवर्धन करते हुए उन्हें आपातकालीन परिस्थितियों में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (First Responder) के रूप में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करना है। कार्यक्रम का संचालन जिला आपदा विशेषज्ञ ओमकार चतुर्वेदी द्वारा किया गया।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर द्वारा जनपद में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जन-जागरूकता एवं सामुदायिक स्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निरंतर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि आपदा की स्थिति में त्वरित, सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए जा सकें।

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